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2020 में मोबाइल छीनने का किया था विरोध
जालंधर: पंजाब के जालंधर में छह साल पहले मोबाइल छीनकर भाग रहे लुटेरों का बहादुरी से सामना करने वाली कुसुम को आखिरकार इंसाफ मिल गया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश परमिंदर सिंह राय की अदालत ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को इस मामले में दो दोषियों को 10-10 साल की कैद की सजा सुनाई। अदालत ने मोबाइल छीनने और नाबालिग छात्रा पर जानलेवा हमला करने के मामले में दोनों को दोषी ठहराया। इस फैसले के साथ वर्ष 2020 की चर्चित घटना एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
जानकारी के अनुसार, अदालत ने दोषी अविनाश कुमार उर्फ आशू, निवासी मोहल्ला बेगमपुरा, बस्ती दानिशमंदा और विनोद कुमार उर्फ झिका, निवासी संत भाग सिंह नगर, मॉडल टाउन को 10-10 साल कैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा अविनाश कुमार पर 70 हजार रुपये और विनोद कुमार पर 75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह घटना 30 अगस्त 2020 की है। उस समय जालंधर के फतेहपुरी मोहल्ला स्थित नींबू वाली गली में रहने वाली कुसुम आठवीं कक्षा की छात्रा थी। वह ट्यूशन पढ़कर अपने घर लौट रही थी। इसी दौरान मोटरसाइकिल पर सवार दो बदमाशों ने उसके हाथ से मोबाइल फोन छीन लिया और भागने लगे।
मोबाइल छीनते ही कुसुम ने हिम्मत नहीं हारी। वह बदमाशों के पीछे दौड़ी और मोटरसाइकिल पर बैठकर भागने का प्रयास कर रहे एक बदमाश की कमीज पकड़कर उसे खींच लिया। अचानक छात्रा के विरोध से बदमाश घबरा गया और खुद को छुड़ाने का प्रयास करने लगा। जब कुसुम ने उसे नहीं छोड़ा तो बदमाश ने धारदार हथियार निकालकर उसकी कलाई पर हमला कर दिया। वार इतना गंभीर था कि कुसुम के हाथ की नसें कट गईं और खून बहने लगा। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उसने आरोपी को पकड़ना नहीं छोड़ा।
इस दौरान कुसुम की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग और राहगीर घटनास्थल की ओर दौड़े। लोगों ने मौके पर ही एक आरोपी को पकड़ लिया, जबकि उसका दूसरा साथी मोटरसाइकिल लेकर भाग निकला। बताया गया कि कुसुम के परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी। उसके पिता पल्लेदारी का काम करते थे। परिवार में उसकी दो बहनें और एक भाई है। कोरोना महामारी के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई के लिए उसके भाई ने करीब 12 हजार रुपये जोड़कर मोबाइल फोन खरीदा था।
इसी मोबाइल से कुसुम अपनी ऑनलाइन कक्षाएं लगाती थी। जब बदमाश उसका फोन छीनकर भागने लगे तो उसने साहस दिखाते हुए उनका मुकाबला किया। इस घटना में गंभीर चोट लगने के बावजूद दिखाई गई बहादुरी के कारण कुसुम की काफी सराहना हुई थी।
कुसुम के साहस को देखते हुए वर्ष 2023 में उसे राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। उसकी कहानी ने विपरीत परिस्थितियों में साहस और हिम्मत का परिचय देने का उदाहरण प्रस्तुत किया।
घटना के बाद आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई और मामला अदालत तक पहुंचा। करीब छह साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने दोनों दोषियों को कारावास और आर्थिक जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत के इस फैसले के बाद कुसुम की बहादुरी एक बार फिर सुर्खियों में है। जिस घटना में उसने अपनी जान जोखिम में डालकर लुटेरों का सामना किया था, उसी मामले में अब दोनों दोषियों को सजा मिल गई है।
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